Thursday, April 10, 2014

Pal Pal Dil ke Paas by Kisore Kumar

पल पल दिल के पास तुम रहती हो
जीवन मिठी प्यास ये कहती हो
हर शाम आँखों पर तेरा आँचल लहराये
हर रात यादों की बारात ले आये
मैं साँस लेता हू तेरी ख़ुशबू आती है
एक महका महका सा पयगाम लाती है
मेरे दिल की घड़कन भी तेरे गीत गाती है
कल तुझको देखा था मैंने अपनी आँगन पे
जैसे कह रही थी तुम, मुझे बाँध लो बन्धन में
ये कैसा रिश्ता है, ये कैसे सपने है
बेगाने हो कर भी, क्यों लगते अपने है
मैं सोच में रहता हँू, डर डर के कहता हूँ
पल पल दिल के पास, तुम रहती हो
तुम सोचोगी क्यों इतना, मैं तुमसे प्यार करूँ
तुम समझोगी दिवाना, मैं भी इकरार करूँ 
दिवानो कि ये बातें, दिवाने जानते है
जलने मैं क्या मज़ा है
परवाने जानते है
तुम युंही जलाते रहना
आ आ कर ख़्वाबों में

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